गुरुवार, 27 सितंबर 2012

आखिर कब तक हम

आखिर कब तक हम अपने पूर्वजों द्वारा,

रोपित फसल ही खाते रहेंगे,

आखिर कब तक हम उनके अच्छे कार्यों की,

बस जय जय कार लगते रहेंगे,

महाराणा ,पृथ्वी,कुंवर सिंह, और बहुत से बड़े हैं नाम,

देश और कौम की खातिर,त्याग दिए जिन्होंने प्राण,

हाँ, उनकी जय जय कार लगाने में है हम सबकी शान,

पर आज का ये युग अब फिर मांग रहा हमसे बलिदान,

आखिर कब तक आपस में लड़ लड़ कर ,


अपना सम्मान लुटवाते रहेंगे,

आखिर कब तक हम आपसी फूट के कारण,

अपना सर्वस्व गंवाते रहेंगे,,

अब तो जागो मेरे रणबांकुरों,तुम ऐसा कुछ कर जाओ,

उनकी जय जय कार करो,अपनी भी जय करवाओ,

जैसे हम उनके वंशज करते सम्मान से उनको याद,

उसी तरह सम्मान करें हमारा, सब इस जग से जाने के बाद ,

हम सब मिलकर ''अमित'' कर जाएँ ऐसा कारनामा,

जिस से सारे गर्व से बोलें ''जय जय वीर राजपूताना''


मंगलवार, 22 मई 2012

जिंदा नज़र आना जरुरी है

उसूलों पे जो आंच आये तो टकराना जरुरी है
जो जिंदा हो तो फिर जिंदा नज़र आना जरुरी है


थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटे
सलीकामंद साखों का लचक जाना जरुरी है

बहुत बेबाक आँखों मे ताल्लुख टिक नहीं पता
महोब्बत मे कशिश रखने को शरमाना जरुरी है


सलीका ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है खुदा है तो नजर आना जरुरी है


मेरी होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
के इसके बाद भी दुनिया मे कुछ पाना जरुरी है

जरा फ़िर सोचिये

क्या आप धर्मनिरपेक्ष हैं ? जरा फ़िर सोचिये और स्वयं के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजिये.....



१. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?


२. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?


३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ८५% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, १५% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?


४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?


५. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?


६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?


७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?


८. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?


९. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है" ?


१०. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?


११. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?


१२. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?


१३. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?


१४. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?

satyameva jayate theme lines

आज कल स्टार चेनल पर आमिर खान का शो काफी पोपुलर हो रहा है, इस शो के विज्ञापन में आमिर खान कुछ लाइन बोलते दीखते है "" सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही, मेरी कोशिश ही ये सूरत बदलनी चाहिए"" शो की इन्ही लाइनों के बारे में मैं आप से कुछ बात करना चाहता हूँ . 

                                  हम सभी ने इन लाइनों को कई बार सुना है पर बहुत ही कम लोग इन लाइनों को पूरी तरह से जानते है . ये लाइनें " कवि दुष्यन्त कुमार (Dushyant Kumar) की कविता " "हो गई है पीर पर्वत-सी"" (Ho Gai Hai Peer Parvat Si) से ली गई है. पूरी कविता नीचे दी जा रही है 

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 हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

 

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

 

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

 

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

 

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।